फिर भौंका प्रशांत भूषण, बोला आजादी के गीतों में हिंदुओं का नहीं बल्कि मुस्लिमो का योगदान

By | May 10, 2018

प्रशांत भूषण जब भी कुछ कहते हैं, विवादों में आ जाते है। कश्मीर जनमत संग्रह पर दिए गए बयान पर तो उनके साथ हाथापाई भी हो गई थी।

अब फिर से वह अपने एक ट्वीट को लेकर सुर्खियों में हैं। देश का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि देश में मुसलमानों की हालत ठीक नहीं है।

उन्हें हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है। संसद में मॉब लिंचिग पर बहस के नाम पर शोरशराबा है और सड़कों पर भीड़ है। गौरक्षा के नाम पर लोग मारे जा रहे हैं। इस माहौल में प्रशांत भूषण के इस ट्वीट के कई मायने हैं।

प्रशांत भूषण का यह ट्वीट 23 जुलाई का है। इस ट्वीट में उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि आजादी के समय के ज्यादातर नारे और गीत मुसलमानों ने दिए और आजादी की लड़ाई में हिंदुत्ववादी संगठनों का कोई योगदान नहीं था।

इस पर लोग भड़क गए। ट्वीट में जो बातें लिखी हैं, वे कुछ यूं हैं- ”मादरे-वतन भारत की जय” का नारा 1857 में अज़ीम उल्लाह खान ने दिया था। ”जय हिंद” का नारा आबिद हसन साफरानी ने दिया था। ”इंकलाब जिंदाबाद” का नारा हसरत मोहानी ने दिया था। ”भारत छोड़ो” का नारा युसुफ मेहर अली ने दिया था। युसुफ मेहर अली ने ही ”साइमन गो बैक” का नारा दिया था। ”सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है”, इसे 1921 में बिस्मिल अज़ीमाबादी ने लिखा था। अल्लामा इकबाल ने तराना-ए-हिंद ”सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा” लिखा था। सुरैया तैयब जी ने तिरंगा को वह रूप दिया, जो हम आज देखते हैं।

इसके आगे लिखा है, ‘संयोगवश इनमें से कोई भी आरएसएस/ वीएचपी/बीजेपी का सदस्य नहीं था।’ अंत में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास के प्रोफेसर अली नदीम रिज़वी का हवाला दिया गया है

One thought on “फिर भौंका प्रशांत भूषण, बोला आजादी के गीतों में हिंदुओं का नहीं बल्कि मुस्लिमो का योगदान

  1. Kanduo ka baap

    Are bhagwa aatanki wadi bhok to tu raha hai or tera baao bhokta rehta hai feku.

    Reply

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