2019 तक ढाई लाख कश्मीरी पंडितो को वापस कश्मीर में बसाना हमारा अगला लक्ष्य:- सुषमा स्वराज

By | May 12, 2018

दरअसल 90 के दशक को कश्मीर में घाटी से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों और हिंदुओं के पलायन के लिए जाना जाता है. 19 जनवरी 1990 की तारीख को कश्मीरी पंडित काले दिन के रूप में याद करते हैं.

बढ़ता आतंकवाद, कट्टरपंथ और हिंदुओं को जान से मारने की मिलने वाली धमकी इसकी प्रमुख वजह थे. इसके बाद 1997, 1998 और 2003 में भी हुई हिंसक घटनाओं के बाद बचे-खुचे लोगों ने भी पलायन का रास्ता पकड़ लिया, लेकिन इन सबके बावजूद कुछ हिंदू परिवार घाटी में रह गए.

जब इतनी बड़ी संख्या में पलायन हुआ तब वे यहां क्यों रुके रह गए? आख़िर इसकी वजह क्या थी? उन्हें घाटी में रहने पर मिला क्या? इन लोगों से मिलने के बाद ऐसे तमाम सवाल ज़ेहन में उठते हैं.

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